सोमवार, 23 अप्रैल 2012

TUTA TARA

हमीं गुमनाम अंधेरों में सिसकते रहे ,
तुम्हारे सामने आने से झिझकते रहे !
लो आज हम बेगाने भी बन बैठे ,
तुम ही सामने आने से हिचकते रहे !!

चलों गैरों ने ठुकराया था ,
आज तुमने भी तड़पाया  है !
कभी थे तुम्हारे  हम , ये सोच  कर ,
अश्क आँखों में झलक आया है !!

जब भी ढूंढा मैंने अपने को ,
सदा खुद ही को गुम पाया है !
छिटक कर आई है चांदनी कैसी , 
दिल में न जाने क्यों अँधेरा सा छाया है !!

वक़्त ने बदली है क्या सोच कर करवट ,
उसे हम पर फिर से प्यार आया है !
चमकता  चाँद है वो उन्मुक्त  गगन का ,
लगता है कोई टुटा तारा,  फिर नज़र आया  है !!

1 टिप्पणी:

  1. kabhi gairo ne thukraya tha aaj tumane bhi tadpaya hai kabhi the tumhare hum ye soch kar ashk aakhon me jhalak ayya hai. really very herat touchable lines

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