Ahsash- Ek Sapna
ahsas-ek sapna
गुरुवार, 18 जुलाई 2013
यादें
ना कुछ सुनती है ना मुझसे कुछ कहती है
लबों पर मुस्कान लिए खुद में ही बिखरती है
आखों में ख्वाब लिए इंतज़ार करती है
ना जाने किसकी याद में वो रोज संवरती है
दर्द सहती है , उलझनों में रहती है
भीड़ में होकर भी तन्हा सी लगती है
हर आहट पर हिरणी सी सिमटी है
ना जाने किसकी याद में वो रोज संवरती है
मनमीत के सपनो में खोई सी रहती है
आसुओं से अपने आंचल को भिगोती है
तड़पती है , मचलती है ,आसमाँ को तकती है
ना जाने किसकी याद में वो रोज संवरती है
लहरों सी उमड़ती है , नदी सी उफनती है
बिजली सी कड़कती है ,सावन सी बरसती है
सागर की गहराई को कंकड़ो से बेधती है
ना जाने किसकी याद में वो रोज संवरती है
बुधवार, 6 मार्च 2013
इश्क का दिया
रातो की तन्हाई में ,चांदनी रातों में अक्सर सोचा करते हैं
क्या खास है तुम में ये मेरी जां , जो हम तुम पर मरते हैं !
खुद से खुद बारम्बार दिल से मैंने एक ही सवाल किया
जवाब आया यही , तुमने ही हर बार प्यार का इज़हार किया !!
तुम को पाकर हम हुए मदहोश से , जुदा हुए तो बावरें हुए
कोशिश की हमने पर बदल न पाए अपने हाथ की लकीरों को !
पलकों में बसे ख्वाबों में तेरे पास होने का सुखद एहसास है
दूर तू है मेरी नजरो से मगर ,मेरी धड़कन का तेरे दिल ही वास है !!
तेरे दीदार को तरस गए मेरे नयन , मोहब्बत की बगिया भी उजाड़ है
आसमां में तारे तरसते है चादनी के दीदार को , चाँद का भी बुरा हाल है !
लौट के आजा मेरे हमदम , इश्क का दरिया भी तेरे बिना उदास है
इंतज़ार की इन्तहान न हो जाये कही , आजा जब तक मेरी साँसों में सांस है !!
बुधवार, 30 जनवरी 2013
मंगलवार, 8 जनवरी 2013
शनिवार, 29 सितंबर 2012
वफ़ा-ये-इश्क
आखिरी वक़्त है जरा कन्धा लगा दीजिये,
होते है मोहब्बत में युही जिंदगी के जलवे
आप वफ़ा-ये-इश्क का रिश्ता निभा दीजिये !
गुलशन में रोज़ खिलते है हजारों फूल युही
आप भी अपनी एक बगियाँ लगा लीजिये
मेरी धडकनों में है बसर आपका ये सनम
आप आपनी यादों में अब तो बसा लीजिये !!
है ख्याविश चाँद , तारों की सबको ,यहाँ
हमें बस एक बार नूर-ये- नज़र करा दीजिये
है आपको पाने का ख्वाब हर दिल अजीज़ की
हमको तो बस सुरीली आवाज़ सुना दीजिये !!!
युही तडपे है आपके दरश को मेरे हमदम
आसमां में महताब की घटा छिटका दीजिये
आप तो साहिल पर है आपके बस में है
मचलते हुए दिलो-जिगर पर मरहम लगा दीजिये !!!!
सोमवार, 13 अगस्त 2012
ये कैसे बदलते रिश्ते .....
ये कैसे बदलते रिश्ते .....
वक़्त की दरिया में बह जाते है कुछ दिल के रिश्ते
तूफ़ान और नदिया से उमड़ते कुछ अनछुए रिश्ते .....
रेंत की मानिंद हथेली से फिसलते कुछ पुलकित रिश्ते
सैलाब की धारा से मिटते है कुछ बनते सवरतें रिश्ते
दिल की गहराइयों में भी सिमटते है कुछ अनूठे रिश्ते
प्यार की नीवं को भी तरसते है कुछ अनजाने रिश्ते ....
फूलों से महकते है इश्क मोहब्ब्बत से पल्लवित रिश्ते
काँटों की चुभन से आनंदित होते है दर्दे दिल के रिश्ते
समय की मझधार में नित मिलते है रिश्ते दर रिश्ते
पलक झपकते ही पलट जाते है होते है कुछ ऐसे रिश्ते ....
राह चलते चलते भी बन जाते है, है कुछ ऐसे रिश्ते
इन्सान को भी आइना दिखाते है कुछ सिमटते रिश्ते
हमने भी देखे है मौसम की तरह हर रोज बदलते रिश्ते
रिश्तों के मायने से भी सजते है कुछ रिश्तों के रिश्ते ....
मंगलवार, 3 जुलाई 2012
ये कैसी जिंदगी !!!
" एक अंतहीन सफ़र है खुद में खुद को खोजने का
ये वो डगर है जिसका न अंत है ...न ही कोई आदि
बस एक रहगुजर है.......जैसे कई जन्मो का सफ़र ....."
समय के गर्भ में लाखों नामों निशान दिखाती है जिंदगी ......
समय के विपरीत चलने की आतुरता बढाती है जिंदगी .......
वक़्त के पहलु में खुद का समावेश निभाती है जिंदगी ....
काल से लड़ने का निरंतर हौसला देती है जिंदगी .......ये कैसी जिंदगी !!
जगाती है जिंदगी रोज एक नया सा अहसास
एक नव उमंग ,एक नयी आस ....
उम्र के तकाजे , नए रिश्तों से मिलाती है जिंदगी
अपनों को अपनों से बेगाना बनाती है जिंदगी.
फिर भी प्यार करना सिखाती है जिंदगी......ये कैसी जिंदगी !!
नव निर्माण , स्वपथ भी बताती है जिंदगी .....
नव निर्माण , स्वपथ भी बताती है जिंदगी .....
कर्म फल , नए विश्वास को जगाती है जिंदगी .......
स्वार्थ में हमें अँधा भी बनाती है जिंदगी.......
मझधार में फसे नाविक को आधार बनाती है जिंदगी ......
स्वार्थ में हमें अँधा भी बनाती है जिंदगी.......
मझधार में फसे नाविक को आधार बनाती है जिंदगी ......
समज सको तो सब कुछ सिखाती है जिंदगी ... ये कैसी जिंदगी !!
खुद ही खुद से झुझना सिखाती है जिंदगी......
काल के थपेड़ों से लहूलुहान भी हो जाती है जिंदगी...
गिरे हुए को भी उठने का जज्बा देती है जिंदगी.....
हौसलों और अरमानों को परवान चढ़ाती है जिंदगी....
जिंदगी ये जिंदगी , सब मिटा फिर नयी जिंदगी बनाती है जिंदगी ..ये कैसी जिंदगी !!
गुरुवार, 28 जून 2012
प्यार और ज़िन्दगी
प्यार ने मुझसे पूछा, ज़िन्दगी क्या है ?
मैंने कहा तेरा मेरे साथ और कुछ भी नहीं !!
प्यार ने फिर मुझसे पूछा, दर्द क्या है ?
मैंने कहा वो पल जब तुम साथ नहीं !!
प्यार ने फिर मुझसे पूछा ,मोहब्बत कहा है ?
मैंने कहा हम दोनों के रूह में कही !!
प्यार ने फिर मुझसे पूछा ,रब कहा है ?
मैंने कहा ,और कहा , तुझमे ही कही !!
प्यार ने फिर पूछा ,हमसे इश्क क्यों है ?
मैंने कहा तुझ जैसा दूसरा कोई नहीं !!
प्यार ने फिर मुझसे पूछा ,धड़कन क्या है ?
मैंने कहा तेरे नाम की सांसों है और कुछ नहीं !!
प्यार ने फिर मुझसे पूछा , समाज क्या है ?
मैंने कहा तुझसे शुरु और तुझमे ही खत्म कही !!
प्यार ने फिर मुझसे पूछा , उल्फत क्या है ?
मैंने कहा तेरा रूठना ,और कुछ नहीं !!
प्यार ने फिर पूछा, इतबार करोगे मेरा ?
मैंने कहा तुमसे बढाकर कोई नहीं !!
प्यार ने फिर पूछा , जी सकते हो मेरे बगैर ?
मैंने कहा, ये सजा मेरे लिए मौत से कम नहीं !!
प्यार ने फिर मुझसे पूछा कि, वो "प्यार" है कौन ?
मैंने कहा.....उसके नाम के लिए मेरे पास शब्द नहीं !!
बुधवार, 27 जून 2012
मंगलवार, 26 जून 2012
आरजू
किसी के प्यार ,इश्क के हम कायल हो गए
दिल के मचलते हुए अरमानो से घायल हो गए
आँखों में थिरकते ख्वाबों से तस्वीर बनायीं जो
वो हमारे आरजू-ये- जिंदगी के साहिल हो गए
दिल के मचलते हुए अरमानो से घायल हो गए
आँखों में थिरकते ख्वाबों से तस्वीर बनायीं जो
वो हमारे आरजू-ये- जिंदगी के साहिल हो गए
अधूरी बात
कभी कुछ कहकर भी हर बात अधूरी रह जाती है
कभी बिना कहे भी हर बात पूरी हो जाती है
कह दो हर वो बात जो तुम्हारे दिल में है सनम
वक़्त के समुन्दर में कई कहानिया अधूरी रह जाती है
शनिवार, 23 जून 2012
ऑंखें
कुछ बात है अधूरी जो लिखे अल्फाजो में नहीं
कुछ झाझ्बात है जो दुनिया के अफसाने में नहीं
हम वो ख़यालात है जो सबको नज़र आते नहीं
एक अदृश्य साथ है जो हम सबको बताते नहीं
कुछ झाझ्बात है जो दुनिया के अफसाने में नहीं
हम वो ख़यालात है जो सबको नज़र आते नहीं
एक अदृश्य साथ है जो हम सबको बताते नहीं
प्यार की दास्ताँ
तेरा प्यार मिला गर तो हम सवर जायेंगे
युही चाहते रहना वरना हम बिखर जायेंगे
रहते हो जिस्म में मेरे धड़कन बनकर
तुम्हारी मोहब्बत में फुल से निखर जायेंगे
युही चाहते रहना वरना हम बिखर जायेंगे
रहते हो जिस्म में मेरे धड़कन बनकर
तुम्हारी मोहब्बत में फुल से निखर जायेंगे
अदाएं
बातों ही बातों में मोहब्बत का इशारा करके
झुकी हुयी आँखों में अदाओं का शरारा झलके
अपने हुस्न के महताब का सितारा बनके
वो हमें मनाता है रोज नया बहाना करके
झुकी हुयी आँखों में अदाओं का शरारा झलके
अपने हुस्न के महताब का सितारा बनके
वो हमें मनाता है रोज नया बहाना करके
दिल का दर्द
दरिया वफा , मोहब्बत का कभी रुकता नहीं ,
इश्क और प्यार में इन्सान कभी झुकता नहीं !
हम चुप है किसी की ख़ुशी के लिए ,जानेजिगर ,
और वो सोचता है की दिल हमारा दुखता नहीं !!
इश्क और प्यार में इन्सान कभी झुकता नहीं !
हम चुप है किसी की ख़ुशी के लिए ,जानेजिगर ,
और वो सोचता है की दिल हमारा दुखता नहीं !!
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