शनिवार, 10 जून 2017

अहद-ए- वफ़ा

ahsas-ek sapna

उसके मिज़ाज़ सा बदलता इस शहर का मंजर क्यों है,
इश्क़ और मोहब्बत के बाजार में गम का असर क्यों है
बिछड़ कर भी नहीं बह गए रेत के घरौंदो की तरह हम
न जानो फिर भी इन मुस्कुराती आँखों में समंदर क्यों है
गुलिस्तां अब भी रोशन है हमारी दीवानगी की दास्ताँ से
चंचल मदमस्त उसकी आँखों में दुनिया का असर क्यों है
किस किस पर कब तलक अहद-ए- वफ़ा , एहतराम रखे
इस शहर में हर शख्स के हाथों में,चमकता ख़ंज़र क्यों है
मोहब्बत से लबरेज़ रिश्ते को अजनबी कर गया वो मेरे
ग़म इसी बात का है कि इस अहसास से वो बेख़बर क्यों है
कतरा कतरा कर गया वो मेरे जज्बातों को रौंद कर
धवल चाँदनी रातों में संजय को अब भी इंतज़ार क्यों है ...Sanjay Rai

शुक्रवार, 24 जून 2016

इस्तकबाल

ahsas-ek sapna



वो मुस्कुरा कर दिलों का इस्तकबाल करता है
ये दीगर है एक तीर से दो दो शिकार करता है
बस दिल की हसरत है कि मेरी राह देखती है
वरना ,कौन यहाँ किसी का इंतज़ार करता है
ख़्वाबों ख्यालों में भी ना आये जो मेरे रकीब के
कुछ आड़े तिरछे करतब मेरा दिलदार करता है
कुछ इस तरीके से सिमटी थी फूल में तितली
ना जाने कौन किसे कितना प्यार करता है ..Sanjay Rai

बुधवार, 2 दिसंबर 2015

मद्धिम मद्धिम

तुम बुलाओं और मैं ना आऊं ऐसे भी तो हालात नहीं
राहें ही तो बदल गयी है दिल में है अभी ज़ज़्बात वही
रिमझिम बरसा सावन लेकिन बुझती इससे अगन नहीं
मद्धिम मद्धिम अरमां सुलगे पर उसमे भी कोई राग नहीं
ख़त्म हुआ अब अफ़साना ,वक़्त सा कोई चालबाज़ नहीं
जिस शैं में था इश्क़ का पहरा अब छुपा कोई राज़ नहीं
मेरे ग़मगीं होने पर यु हैरान ना हो,तू मेरा महताब नहीं
मैं चहुँ फलक सा बिखरा हूँ ,पर तू अब मेरा आज नहीं ....Sanjay Rai

बुधवार, 23 सितंबर 2015

सौगात

ahsas-ek sapna

पास हम अपने समन्दर के किनारे रखते हैं,
आँखों में स्वपनिल सलोने नज़ारे रखते है
चिंगारियाँ से क्या डराओगे मुझे संगदिल ,
दिलों में हम तो जलते हुए अंगार रखते हैं..
.
मिट जाये जो लहरों से हम वो रेत के घरौंदे नहीं
जलती लौ को ,आँधियों के लिए सौगात रखते हैं...
तुम अप्सरा होगी,होंगे तुम्हारे दीवाने लाखों
दामन में हम भी "मेनका " की सौगात रखते हैं..
.
तुम्हें नाज़ होगा अपनी ताजमहल सी काया पर
पर हम भी अपने दिल में एक मुमताज़ रखते है ....Sanjay Rai
.

बेकरारी

ahsas-ek sapna

हो गया कुछ इज़ाफ़ा मेरी भीअक्ल में
जब से गैरों के घर आना-जाना हुआ
बेकरारी ने आँखों में निदियाँ आने न दी
कुछ इस कदर उनका आना जाना हुआ
अपने नाज़ो अदाओं से ग़ाफ़िल न थे वो
नजरें चुरा के जाना तो एक बहाना हुआ
वक्त के साथ आशियाना बदल जाता है
उड़ते परिंदों का कब इक ठिकाना हुआ ....Sanjay Rai

अधूरे ख़्वाब

ahsas-ek sapna

कुछ ख़्वाब अधूरे रह गए , कुछ यादें अधूरी रह गयी
कुछ वादे अधूरे रह गए , कुछ बातें अधूरी रह गयी
कही बादल बरसते रह गए , कही जमीं तरसती रह गयी
रेत के अम्बार उड़ते रह गए ,कुछ बरसातें अधूरी रह गयी
कही समुंदर उमड़ पड़ा , कही शबनम की बुँदे रह गयी
कही अश्क़ छलक पड़े , कही जिंदगी तड़पती रह गयी
महफ़िलों का दौर चलता रहा , उदासी गीत गाती रह गयी
जिक्र जब तेरा जुबां पर आया तो , हर साँस अधूरी रह गयी ....Sanjay Rai

सोमवार, 27 जुलाई 2015

गणित परीक्षा

ahsas-ek sapna

गणित परीक्षा थी उस दिन , डर से मेरा बुरा हाल हुआ
घर के बाहर कदम रखते ही बिल्ली से साक्षात्कार हुआ
सवाल मैंने थे जो याद किये वे केवल आधे ही याद हुए
उसमे भी कुछ स्कूल तलक आते आते बर्बाद हुए
परचा हाथों में आते ही दिल मेरा मोर सा झूम गया
पढ़ते ही छाया अंधकार और चक्कर से सर घूम गया
ये १०० नंबर का परचा है मुझको तो दो की आस नहीं
सारी दुनिया आ जाये फिर भी पास होने का चांस नहीं
तूने चुन चुन पूछे थे वो सवाल जो मैंने थे रटे नहीं
हाय रे प्रश्न पूछने वाले ,तेरे दिल में कोई दया नहीं
लिखना था "पाइथागोरस थ्योरी" , मै न्यूटन लॉ को लिख आया
"ट्रिगोमेट्री" की आड़ी तिरछी लकीरों ने मुझको बड़ा भरमाया
अलजेब्रा में "ज़ेब्रा " का रोल कुछ समझ नही आता है
जाने क्यों गणित के विद्य्नो को ये सहज ही भाता है
लीनियर एकौशन में क्रॉस मल्टिप्लिकेशन का खेल है क्या
अब तक समझ न आया प्रॉफिट- लॉस में % का मेल है क्या
मेंसुरेशन और डेटा एंट्री ना जाने क्या क्या खेल दिखाते है
टाइम ,वर्क , रैशनल नंबर ,पावर ,रुट संग धूम मचाते है
" फक्टरीज़ेशन ' और " क्वाड्रीलेटरल " है बहुत ही मतवाले
सवाल "इनडाइरेक्ट वैरीएशन" के 'स्क्वायर रुट ' में लिख डाले
हो गया परीक्षक पागल सा, मेरी उत्तर-पुस्तिका को देखकर
है होनहार यही यहाँ ,रख ली मेरी कॉपी औरों की कॉपी फेंक कर
औरों की कॉपी फाड़ दी , सिर्फ मेरे सारे उत्तर छांट लिए
१०० में जीरो नंबर देकर सारे के सारे नंबर काट लिए .Sanjay Rai
— with Rp Singh and 8 others.

वो मेरा स्कूल जाना

ahsas-ek sapna

शर्ट के बटनों को ऊपर - नीचे लगाना
और बालों में कभी खुद कँघी न कर पाना
पी टी शूज को चाक से घिस के चमकाना,,
और काले जूतों को पैंट से पोछते जाना
याद आ गया मुझे वो मेरा स्कूल जाना …… 

बढ़ते नाखुनो को धीरे से दांतों से चबाना
और लेट आने पर कोई नया बहाना बनाना
वो प्रार्थना के समय कक्षा में ही रुक जाना
और पकडे जाने पर पेट दर्द का बहाना बनाना
याद आ गया मुझे वो मेरा स्कूल जाना ……

साथी के बैठने से पहले ही बेंच सरकाना
और उसके गिरने पर जोर से खिलखिलाना
फिर गुस्से में एक-दूसरे पर धौंस जमाना
और एक साथ मिल दोस्तों की खिली उड़ाना
याद आ गया मुझे वो मेरा स्कूल जाना ……

वो कलम की स्याही को बालो से पोछते जाना
बाथरूम में सुतली बम को अगरबती से सुलगाना
और पकड़े जाने पर मासूम बन गर्दन झुकाना
याद आ गया मुझे वो मेरा स्कूल जाना ……

वो गेम्स पीरियड के लिए टीचर को पटाना
यूनिट टेस्ट को टालने के लिए उनसे गिडगिडाना
लाल –काला चूरन खा एक दूसरे को जीभ दिखाना
जलजीरा, इमली देख कर खूब लार टपकाना
याद आ गया मुझे वो मेरा स्कूल जाना ……

आइसक्रीम खिलाने के लिए दोस्तों से मिन्नतें करवाना
और लंच से पहले ही सारा टिफ़िन चट कर जाना
अचार की खुशबूं को पूरे कक्षा में फैलाना
और पानी पिने के बहाने व्यर्थ समय गवाना
याद आ गया मुझे वो मेरा स्कूल जाना ……

बाथरूम में लिखे शब्दों को बार-बार पढके सुनाना
परीक्षा से पहले गुरूजी के घर का चक्कर लगाना
बार बार बस महत्वपूर्ण प्रश्न पूछते जाना
और पूरे कोर्स को देख सिर का चकराना
याद आ गया मुझे वो मेरा स्कूल जाना ……

वो अपनी फेयरवेल पार्टी में मौज उड़ाना
और जूनियर लड़को को ब्रेक डांस दिखाना
फिर टाइटल मिलने पर हमारा तिलमिलाना
वो साइंस वाली मैडम पर लट्टू हो जाना
याद आ गया मुझे वो मेरा स्कूल जाना ……

समय के रथ का अपनी गति से चलते जाना
किसी चौराहे पर किसी का बरबस मिल जाना
वो जवान गुरूजी का बूढ़ा चेहरा सामने आना ..
गुरु के चरणों में पड़ते ही गुरु का चौंक जाना
याद आ गया मुझे वो मेरा स्कूल जाना ……

चेहरा देख कर मुझे पहचान जाना
यादों के झोली से कुछ अनकहे किस्से सुनना
और मेरी सफलता पर गर्व से तन जाना
आशीष दे फिर अपना फ़र्ज़ निभाना
याद आ गया मुझे वो मेरा स्कूल जाना ……



आईना

ahsas-ek sapna

आईना कही दर्दे दिल की हकीकत ना बयाँ कर दे
इसलिए आइनों में सूरत देखना छोड़ दिया उसने
कभी रोशन थे सतरंगी चिराग जिनकी महफ़िल में
मसरूफ रहने का अंदाज शायद सीख लिया उसने
गैर से हो गए है वो जो गुलनार से खिल जाते थे 
प्यार उमड़े न फिर, नाम से रिश्ता तोड़ लिया उसने ……
पर, जख्म सब्ज़ रहे इश्क़ और मोहब्बत के तरानों के
इसलिए किताब-ए-दिल में सूखा गुलाब रहने दिया उसने ..

मंगलवार, 18 नवंबर 2014

इश्क़- ए- जुनूँ

उन्हें पाने को मेरा इश्क़- ए- जुनूँ हद तक जारी रहे
कि पाज़ेब की झनकार दिल के मैकदो में शामिल रहे 

नूर-ए-चांदनी से चेहरे पर छाया है ख़ुशी का सबेरा
कि आरज़ू-ए-शकून ,महफिल-ए-तरन्नुम बाकी रहे
मोहब्बत में डूबी- डूबी सी लगती है फ़िज़ा की रंगत ,
कि तसव्वुर में सजनी से मिलन की राह सजती रहे
बेपरवाह अदाओं की बारिश से लरजती मयक़शा ऑंखें
कि मेरे दिलकश शाकी की तमनाएँ आरज़ू भी बाकी रहे,
बूंद बूंद सी बिखरी ज़श्न-ए-जुस्तज़ू की महफ़िल यारों
कि खामोश निग़ाहों में फिर भी उनकी तलाश बाकी रहे.

बुधवार, 16 जुलाई 2014

वजूद


तुम्हारे सीने में धड़कती काश कुछ साँसे भी हमारी होती ,
दर्दे -ए - दिल में सिसकती काश दो आहें भी हमारी होतीं
लहरों की तरह उमड़ती घुमड़ती जज़्बातों की आंधी सी ,
इन खामोश लबों पर कुछ अनकही बातें भी हमारी होती !!
फकत चांदनी में तेरी नाजों अदाओं से क्या रूबरू होना
काश अंधियारों में तुम्हारे वजूद से भी पहचान हमारी होती ,
बन जाता एक और आशियाँ फूलों भरा इस दुनिया में
चंद लम्हों को ही सही काश तुम आगोश में हमारी होती !!

वक़्त के इम्तिहान में डूबकर कर ही मिलते है मोती अक्सर ,
वरना इन ठहरी हुए आँखों में खुशियों की सौगात भी हमारी होती ,
रेत की मानिंद हथेली से फिसलती रही तकदीर अक्सर ,वरना
छुईमुई संगमरमरी सी तुम्हारी काया पर तहरीर भी हमारी होतीं !!
Photo: तुम्हारे सीने में धड़कती काश कुछ साँसे भी हमारी होती ,
दर्दे -ए - दिल में सिसकती काश दो आहें भी हमारी होतीं,
लहरों की तरह उमड़ती घुमड़ती जज़्बातों की आंधी सी ,
इन खामोश लबों पर कुछ अनकही बातें भी हमारी होती  !!

फकत चांदनी में तेरी नाजों अदाओं से क्या रूबरू होना  
काश अंधियारों में तुम्हारे वजूद से भी पहचान हमारी होती  ,
बन जाता एक और आशियाँ फूलों भरा इस दुनिया में 
चंद लम्हों को ही सही काश तुम आगोश में हमारी होती !!

वक़्त के इम्तिहान में डूबकर कर ही मिलते है मोती अक्सर  ,
वरना इन ठहरी हुए आँखों में खुशियों की सौगात भी हमारी होती ,
रेत की मानिंद हथेली से फिसलती रही तकदीर अक्सर ,वरना 
छुईमुई संगमरमरी सी तुम्हारी काया पर तहरीर भी हमारी होतीं !!
k sapna

गुरुवार, 21 नवंबर 2013

आखिर दिल तो हमारा है.

आपके नाज़ों अदाओं पर ही तो दिल निसार हमारा है ......
अक्स अगर तुम्हारा है तो आईना -ए-  दिल हमारा है ..... 
ग़र जो दिल मिल जाये, फिर हर एक ज़ुल्म ग़वारा है.......
काटों का दर्द किसने देखा है गुलिस्तां सबको प्यारा है......

वो शौक से फरेब देते रहे, रेत पर कब बना आशियाना है ......
बादलों के मध्य भी चाँदनी को चाँद के पास ही आना है ...... 
बचपन की शोखी शरारत को दिलकश संगीत बनाना है ...
जल के जो ना बुझे, तेरे धड़कनो में वो अगन लगाना है 

कैसे गुज़रे कोई यहाँ से , तुमको सज़दा किये बगैर ...
तुम्हारी सादगी से बचे कैसे बड़ी शिद्दत से पुकारा है....
काहे का शिकवा ,शिकायत जब सब कुछ तुम्हारा है ..
दर्द तो होता है, मगर....... आखिर दिल तो हमारा  है....

गुरुवार, 18 जुलाई 2013

Ahsash- Ek Sapna-यादें

Ahsash- Ek Sapna

ahsas-ek sapna

यादें



ना कुछ सुनती है ना मुझसे कुछ कहती है 
लबों पर मुस्कान लिए खुद में ही बिखरती है 
आखों में ख्वाब लिए इंतज़ार करती है 
ना जाने किसकी याद में वो रोज संवरती है 

दर्द सहती है , उलझनों में रहती है 
भीड़ में होकर भी तन्हा सी  लगती है 
हर आहट पर हिरणी सी सिमटी है 
ना जाने किसकी याद में वो  रोज संवरती है  

मनमीत के सपनो में खोई सी रहती है 
आसुओं से अपने आंचल को भिगोती है 
तड़पती है , मचलती है ,आसमाँ को तकती है
ना जाने किसकी याद में वो  रोज संवरती है   

लहरों सी उमड़ती है , नदी सी उफनती है 
बिजली सी कड़कती है ,सावन सी बरसती है 
सागर  की गहराई को कंकड़ो से बेधती है 
ना जाने किसकी याद में वो  रोज संवरती है   

बुधवार, 6 मार्च 2013

इश्क का दिया


रातो की  तन्हाई  में ,चांदनी रातों में  अक्सर सोचा करते हैं
क्या खास है तुम में ये मेरी जां , जो  हम तुम पर  मरते हैं !
 खुद से खुद  बारम्बार दिल से मैंने  एक ही सवाल किया 
जवाब आया  यही , तुमने ही हर बार  प्यार का  इज़हार किया !!

तुम को पाकर हम हुए मदहोश से , जुदा हुए तो बावरें हुए 
कोशिश की हमने  पर बदल  न पाए अपने हाथ की लकीरों को !
पलकों में बसे ख्वाबों  में तेरे पास होने का सुखद  एहसास है
दूर तू है मेरी  नजरो से मगर ,मेरी धड़कन का तेरे  दिल ही वास  है !!

 तेरे दीदार को तरस गए मेरे नयन , मोहब्बत की बगिया भी उजाड़ है
आसमां में तारे तरसते है चादनी के दीदार को , चाँद का भी बुरा हाल है  !
 लौट के आजा मेरे हमदम , इश्क का दरिया भी  तेरे  बिना  उदास है
इंतज़ार की इन्तहान न हो जाये कही ,  आजा जब  तक मेरी  साँसों में सांस है !!


शनिवार, 29 सितंबर 2012

वफ़ा-ये-इश्क




रिश्ता-ये-दर्दे दिल अब तो निभा दीजिये ,
आखिरी वक़्त है जरा कन्धा लगा दीजिये,
होते है मोहब्बत में युही जिंदगी के जलवे 
आप वफ़ा-ये-इश्क का रिश्ता  निभा दीजिये  !

गुलशन में रोज़ खिलते है हजारों फूल युही 
आप  भी अपनी एक बगियाँ लगा लीजिये 
मेरी धडकनों  में है बसर आपका ये सनम 
आप आपनी यादों में अब तो बसा लीजिये !!

है ख्याविश चाँद , तारों की सबको ,यहाँ 
हमें बस एक बार नूर-ये- नज़र करा दीजिये 
है आपको पाने का ख्वाब हर दिल अजीज़ की 
हमको तो बस सुरीली आवाज़ सुना दीजिये !!!

युही तडपे है आपके दरश को मेरे हमदम 
आसमां में महताब की घटा छिटका दीजिये 
आप तो साहिल पर है आपके बस में है
मचलते हुए दिलो-जिगर पर मरहम लगा दीजिये !!!!

सोमवार, 13 अगस्त 2012

ये कैसे बदलते रिश्ते .....

ये कैसे बदलते रिश्ते .....

वक़्त की दरिया में बह  जाते है कुछ  दिल के रिश्ते
तूफ़ान और नदिया से उमड़ते कुछ अनछुए रिश्ते .....

रेंत की मानिंद हथेली से फिसलते कुछ पुलकित  रिश्ते 
सैलाब की  धारा से मिटते है कुछ बनते सवरतें  रिश्ते 
दिल की गहराइयों में भी सिमटते है कुछ अनूठे रिश्ते 
प्यार की नीवं को भी तरसते है  कुछ  अनजाने  रिश्ते ....

फूलों से महकते है इश्क मोहब्ब्बत से पल्लवित रिश्ते 
काँटों की चुभन से आनंदित होते है दर्दे दिल के रिश्ते 
समय की मझधार में नित मिलते है रिश्ते दर रिश्ते 
पलक झपकते ही पलट जाते है होते है कुछ ऐसे रिश्ते ....

राह चलते चलते भी बन जाते है, है कुछ ऐसे रिश्ते 
इन्सान को भी आइना दिखाते है कुछ सिमटते रिश्ते 
हमने भी देखे है मौसम की तरह हर रोज  बदलते  रिश्ते 
रिश्तों के मायने से भी सजते है  कुछ रिश्तों के रिश्ते ....


गुरुवार, 5 जुलाई 2012

पैगाम


जब हमारे पैगाम का कोई जवाब नहीं आता ,

जब दर्दे दिल के नगमो को पढ़ा नहीं जाता !

लोग समझते है की "वो " भूल गए हमको ,

ख्याल तो " उनको " आता है , हमारा

पर शायद " हमारे" लिए लफ्ज़ नहीं मिल पता !!